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गोपेश जी महाराज ने कहा कि मां जगदंबा की इच्छा ही सर्वोपरि है. संपूर्ण जगत को मोहित करने वाली महामाया भी यही हैं और माया के बंधन से मुक्त करने वाली सच्चिदानन्दमयी आद्या सनातनी शक्ति भी यही हैं. उन्होंने कहा कि अधर्म की नींव पर कितना ही सुंदर धर्म का महल बना हो, विनाश तय है. साथ ही महाराज ने कहा कि पराई स्त्री को जो मां-बहन की दृष्टि से नहीं देखता, उसकी बड़ी दुर्गति होती है. यह नियम स्त्रियों के लिए भी शास्त्रों में निर्धारित है

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